ख़ुत्बात  
  38- आपका इरषादे गिरामी (जिसमें “ाुबह की वजहे तसमिया बयान की गई है और लोगों के हालात का ज़िक्र किया गया है।) यक़ीनन “ाुबह को “ाुबह इसीलिये कहा जाता है के वह हक़ से मुषाबेह होता है। इस मौक़े पर औलियाअल्लाह के लिये यक़ीन की रोषनी होती है और सिम्त हिदायत की रहनुमाई। लेकिन दुष्मनाने ख़ुदा की दावत गुमराही और रहनुमा बे बसीरती होती है। याद रखो के मौत से डरने वाला मौत से बच नहीं सकता है और बक़ा का तलबगार बक़ाए दवाम पा नहीं सकता है।