ख़ुत्बात
 
ख़ुत्बा-15



[ हज़रत उसमान की अता कर्दा (द्वारा प्रदान की गई) जागींरे जब पलटा दीं तो फ़रमाया ]

ख़ुदा की क़सम! अगर मुझे ऐसा माल भी कहीं नज़र आता तो औरतों के महर और कनीज़ों (दासियों) की ख़रीदारी पर सर्फ़ (व्यय) किया जा चुका होता तो उसे भी वापस पलटा लेता। चूंकी अदल (न्याय) के तक़ाज़ों (मांगों) को पूरा करने में वुसअत (विशालता) है और जिसे अदल की सूरत (न्याय की स्थिति) में तंगी महसूस हो उसे ज़ुल्म की सूरत (अत्याचार) में और ज़ियादा तंगी महसूस होगी ।