ख़ुत्बात
 


ख़ुत्बा-14



[ यह भी अहले बसरा की (निन्दा) में है ]

तुम्हारी ज़मीन (समुन्दर के) पानी से क़रीब और आस्मानसे दूर है। तुम्हारी अक़लें सुबुक (बुद्दियां तुच्छ) और दानाइयां खा़म (चतुराइयां कच्ची) हैं। तुम हर तीर अन्दाज़ का निशाना हर खाने वाला का लुक़मा, और शिकारी की सैद अफ़गनियों का शिकार हो ।