ख़ुत्बात
 



ख़ुत्बा-9



आपके कलाम का एक हिस्सा

जिसमें अपने और बाज़ मुख़ालेफ़ीन के औसाफ़ का तज़किरा फ़रमाया है और “ाायद इससे मुराद अहले जमल हैं।


यह लोग बहुत गरजे और बहुत चमके लेकिन आखि़र में नाकाम ही रहे जबके हम उस वक़्त तक गरजते नहीं हैं जब तक दुश्मन पर टूट न पड़ें और उस वक़्त तक लफ़्ज़ों की रवानी नहीं दिखलाते जब तक के बरस न पड़ें।