ख़ुत्बात
 



ख़ुत्बा-8


आपका इरशादे गिरामी ज़ुबैर के बारे में

(जब ऐसे हालात पैदा हो गए और उसे दोबारा बैअत के दायरे में दाखि़ल करने की ज़रूरत पड़ी
)

ज़ुबैर का ख़याल यह है के उसने सिर्फ हाथ से मेरी बैअत की है और दिल से बैअत नहीं की है। तो बैअत का तो बहरहाल इक़रार कर लिया है अब सिर्फ दिल के खोट का इदआ करता है तो उसे इसका वाज़ेअ सुबुत फराहम करना पड़ेगा वरना इसी बैअत में दोबारा दाखि़ल होना पड़ेगा जिससे निकल गया है।