ख़ुत्बात
 



ख़ुत्बा-5


आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा

(जो आपने वफ़ाते पैग़म्बर (स0) के मौक़े पर इरशाद फ़रमाया था जब अब्बास और अबू सुफ़ियान ने आपसे बैअत लेने का मुतालबा किया था
)

अय्योहन्नास! फ़ितनों की मौजों को निजात की कश्तियों से चीर कर निकल जाओ और मनाफ़ेरत के रास्तों से अलग रहो। बाहेमी फ़ख़्र्र व मुबाहात के ताज उतार दो के कामयाबी इसी का हिस्सा है जो उठे तो बालो पर के साथ उठे वरना कुरसी को दूसरों के हवाले करके अपने को आज़ाद कर ले। यह पानी बड़ा गन्दा है और इसका लुक़मे में उच्छू लग जाने का ख़तरा है और याद रखो के नावक़्त (बेवक़्त) फल चुनने वाला ऐसा ही है जैसे नामुनासिब ज़मीन में ज़राअत करने वाला।

(मेरी मुश्किल यह है के) मैं बोलता हूँ तो कहते हैं के इक़्तेदार की लालच रखते हैं और ख़ामोष हो जाता हूँ तो कहते हैं के मौत से डर गए हैं।

((अमीरूल मोमेनीन (अ0) ने हालात की वह बेहतरीन तस्वीरकषी की है जिसकी तरफ़ अबू सुफ़ियान जैसे अफ़राद मुतवज्जोह नहीं थे या साज़िशों का परदा डालना चाहते थे आपने वाज़ेअ लफ़्ज़ों में फ़रमा दिया के मुझे इस मुतालब-ए- बैअत और वादाए नुसरत का अन्जाम मालूम है और मैं इस वक़्त क़याम को नावक़्त क़याम तसव्वुर करता हूँ जिसका कोई मुसब्बत नतीजा निकलने वाला नहीं है लेहाज़ा बेहतर यह है के इन्सान पहले बालो पर तलाष कर ले उसके बाद उड़ने का इरादा करे वरना ख़ामोष होकर बैठ जाए के इसी में आफ़ियत है और यही तक़ाज़ाए अक़्ल व मन्तक़ है। मैं उस तान व तन्ज़ से भी बाख़बर हूँ जो मेरे एक़दामात के बारे में इस्तेमाल हो रहे हैं लेकिन मैं कोई जज़्बाती इन्सान नहीं हूँ के इन जुमलों से घबरा जाऊँ, मैं मषीयते इलाही का पाबन्द हूँ और उसके खि़लाफ़ एक क़दम आगे नहीं बढ़ा सकता हूँ।))

अफ़सोस अब यह बात जब मैं तमाम मराहेल देख चुका हूँ, ख़ुदा की क़सम अबूतालिब का फ़रज़न्द मौत से उससे ज़्यादा मानूस है जितना बच्चा सरचश्मा-ए-हयात से मानूस होता है। अलबत्ता मेरे सीने की तहों में एक ऐसा पोषीदा इल्म है जो मुझे मजबूर किये हुए है वरना उसे ज़ाहिर कर दूँ तो तुम उसी तरह लरज़ने लगोगे जिस तरह गहने कुँए में रस्सी थरथराती और लरज़ती है।