ख़ुत्बात
 



ख़ुत्बा-4


आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा

(जो फ़सीह तरीन कलेमात में शुमार होता है और जिसमें लोगों को नसीहत की गई है और इन्हें गुमराही से हिदायत के रास्ते पर लाया गया है।
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(तल्हा व ज़ुबैर की बग़ावत और क़त्ले उस्मान के पस मन्ज़र में फ़रमाया) तुम लोगों ने हमारी ही वजह से तारीकियों में हिदायत का रास्ता पाया है और बलन्दी के कोहान पर क़दम जमाए हैं और हमारी ही वजह से अन्धेरी रातों से उजाले की तरफ़ बाहर आए हो।

वह कान बहरे हो जाएं जो पुकारने वाले की आवाज़ न सुन सकें और वह लोग भला धीमी आवाज़ को क्या सुन सकेंगे जिनके कान बलन्द तरीन आवाज़ों के सामने भी बहरे ही रहे हों। मुतमईन दिल वही होता है जो यादे इलाही और ख़ौफ़े ख़ुदा में मुसलसल धड़कता रहता है। मैं रोज़े अव्वल से तुम्हारी ग़द्दारी के अन्जाम का इन्तेज़ाम कर रहा हूँ और तुम्हें फ़रेब ख़ोरदा लोगों के अन्दाज़ से पहचान रहा हूँ। मुझे तुमसे दीनदारी की चादर ने पोषीदा कर दिया है लेकिन सिद्क़ नीयत ने मेरे लिये तुम्हारे हालात को आईना कर दिया है। मैंने तुम्हारे लिये गुमराही की मन्ज़िलों में हक़ के रास्तों पर क़याम किया है जहां तुम एक दूसरे से मिलते थे लेकिन कोई राहनुमा न था और कुँआ खोदते थे लेकिन पानी नसीब न होता था। आज मैं तुम्हारे लिये अपनी इस ज़बाने ख़ामोष को गोया बना रहा हूँ जिसमें बड़ी क़ूवते बयान है। याद रखो के उस शख़्स की राय गुम हो गयी है जिसने मुझ से रू गरदानी की है। मैंने रोज़े अव्वल से आज तक हक़ के बारे में कभी शक नहीं किया है। (मेरा सकूत मिस्ले मूसा (अ) है) मूसा को अपने नफ़्स के बारे में ख़ौफ़ नहीं था, उन्हें दरबारे फ़िरऔन में सिर्फ़ यह ख़ौफ़ था के कहीं जाहिल जादूगर और गुमराह हुक्काम अवाम की अक़्लों पर ग़ालिब न आ जाएं। आज हम सब हक़ व बातिल के रास्ते पर आमने-सामने हैं और याद रखो जिसे पानी पर ऐतमाद होता है वह प्यासा नहीं रहता है।