सृष्टि, ईश्वर और धर्म
 



चमत्कार एवं ईश्वरीय दूत





इस संसार में घटने वाली घटनाएं मूल रूप से उन कारकों का परिणाम होती हैं जो प्राकृतिक रूप से निर्धारित होती हैं

और उन्हें प्रयोगों द्वारा समझा जा सकता है उदाहरण स्वरूप रसायन व भौतिक शास्त्र द्वारा प्रयोगों से बहुत से प्रक्रियाओं को पूर्ण रूप से समझा जा सकता है किंतु कुछ ऐसे काम भी होते हैं

जिनके कारणों को भौतिक व रासायनिक प्रयोगों से समझना संभव नहीं होता। इस प्रकार के कामों और प्रक्रियाओं को असाधारण कार्य कहा जाता है।

वास्तव में असाधारण कार्यों को एक दृष्टि से दो भागों में विभाजित किया जा सकता है

एक वह साधारण कार्य जो सामान्य और साधारण कारकों के अंतर्गत नहीं होते किंतु एक सीमा तक उसके कारकों पर मनुष्य का नियंत्रण होता है।

अर्थात विदित रूप से कुछ ऐसे काम होते हैं जिन्हें करना हर एक मनुष्य के लिए संभव नहीं होता किंतु जो भी उसकी शर्तों को पूरा करे और उसके लिए आवश्यक अभ्यास करे

उसमें इस प्रकार के असाधारण काम करने की क्षमता उत्पन्न हो जाती है। इस प्रकार के असाधारण कार्य योगियों और जादूगरों द्वारा दिखाई देते हैं।

निश्चित रूप से एक योगी और जादूगर जो तमाशा व खेल दिखाता है वह देखने में असाधारण नज़र आता है

और हर एक के लिए वैसे काम करना संभव नहीं होता किंतु इसके बावजूद हम उसे वैसा चमत्कार नहीं कह सकते जिससे किसी का ईश्वरीय दूत होना सिद्ध होता हो क्योंकि वह काम असाधारण होते हैं

किंतु मनुष्य के लिए उसकी क्षमता प्राप्त करना संभव होता है।

असाधारण कार्यों का दूसरा प्रकार वह असाधारण काम हैं जो ईश्वर की विशेष अनुमति पर निर्भर होते हैं। इस प्रकार के असाधारण कार्य की विशेषता यह होती है

कि उसे केवल वही लोग कर सकते हैं जिनका ईश्वर से विशेष संपर्क हो और इस प्रकार के असाधारण कार्य की क्षमता, अभ्यास या तपस्या से प्राप्त नहीं हो सकती,

बल्कि इसके लिए ईश्वर की विशेष दृष्टि आवश्यक है।

इस प्रकार के असाधारण कार्य की जिसके लिए ईश्वर की विशेष कृपा और उससे विशेष संबंध आवश्यक होता है मूल रूप से दो विशेषताएं होती हैं,

पहली विशेषता यह होती है कि इस प्रकार के असाधारण कार्य सीखे या सिखाए नहीं जा सकते और उस पर किसी अधिक शक्तिशाली शक्ति का प्रभाव नहीं पड़ता।

अर्थात पहले प्रकार के असाधारण कार्य जिसकी क्षमता प्राप्त की जा सकती है अधिक क्षमता रखने वाले मनुष्य के असाधारण कार्य से प्रभावित हो जाते हैं।

उदाहरण स्वरूप यदि कोई जादूगर कोई असाधारण कार्य करता है तो संभव है कि उससे बड़ा जादूगर उसके काम को प्रभावित कर दे किंतु दूसरे प्रकार का असाधारण कार्य जो ईश्वर की अनुमति से होता है

उस पर किसी भी अन्य शक्ति का प्रभाव नहीं पड़ सकता।

ईश्वर की विशेष अनुमति से होने वाले कार्य पापी व्यक्ति नहीं कर सकता किंतु यह भी आवश्यक नहीं है कि ईश्वर की विशेष अनुमति से किये जाने वाले कार्य केवल ईश्वरीय दूत ही करें बल्कि यह भी संभव है

कि ईश्वर से निकट और पापों से दूर रहने वाला कोई ऐसा व्यक्ति भी इस प्रकार के काम करे जो ईश्वरीय दूत के पद पर न हो तो इस दशा में उसका काम यद्यपि असाधारण होगा और ईश्वर की

विशेष अनुमति से होगा और उसकी क्षमता प्राप्त करना हर एक के लिए संभव नहीं होगा और उस पर कोई अन्य शक्ति अपना प्रभाव नहीं डाल पाएगी किंतु इन सब के बावजूद उसके काम को

विशेष अर्थों में मोजिज़ा या चमत्कार का नाम नहीं दिया जा सकता बल्कि इस प्रकार के काम भी साधारण चमत्कार और करामत की सूचि में आते हैं। यह ठीक इसी प्रकार है जैसे ईश्वर की

ओर से प्राप्त होने वाली हर विद्या व शिक्षा को ईश्वरीय संदेश नहीं कहा जा सकता। क्योंकि संभव है बहुत से पवित्र और ईश्वर से निकट लोग,

ईश्वरीय माध्यमों से संदेश प्राप्त करें किंतु हमने जिस ईश्वरीय संदेश की बात की है वह केवल वही संदेश हो सकता है जो ईश्वरीय दूतों को प्राप्त होता है।

इस प्रकार से यह स्पष्ट हुआ कि वह असाधारण कार्य जो ईश्वर की विशेष अनुमति से हो और जिसका करने वाला ईश्वरीय दूत हो उसे ही ईश्वरीय दूतों की पैग़म्बरी को प्रमाणित करने वाला

चमत्कार माना जा सकता है। इसी प्रकार हमारी अब तक की चर्चा से यह भी स्पष्ट हो गया कि हम किस प्रकार ईश्वरीय असाधारण कार्य और मानवीय असाधारण कार्यों के अंतर को चहचानें।

स्पष्ट है कि यदि कोई पापी व बुराई करने वाला व्यक्ति कोई असाधारण कार्य करता है तो हमें यह जान लेना चाहिए कि उसका यह विशेष कार्य ईश्वरीय अनुमति से नहीं है

क्योंकि ईश्वर बुराई करने वाले को इस प्रकार की क्षमता कदापि प्रदान नहीं कर सकता। अब यदि कोई असाधारण कार्य करता है और इसके साथ ही

शैतान का अनुयायी भी हो और बुरे काम भी करता हो तो इसका अर्थ यह होगा कि उसका ईश्वर से नहीं शैतान से संबंध है

इस लिए यदि वह ईश्वरीय दूत होने या भगवान होने का दावा करे जैसा कि पहले कई लोग कर चुके हैं और आज भी बहुत से लोग इस प्रकार का दावा करते हैं,

तो उसका यह दावा झूठा होगा और एक धार्मिक व्यक्ति को उसके आदेशों का पालन करने पर स्वयं को बाध्य नहीं समझना चाहिए।

यहां पर यह भी स्पष्ट करें कि ईश्वरीय अनुमति से होने वाले असाधारण कार्य वास्तव में ईश्वर के कामों में गिने जाते हैं यह अलग बात है कि

चूंकि ईश्वरीय दूत इस प्रकार के कामों के लिए साधन होते हैं इसलिए इन कामों को उनके काम भी कहा जाता है जैसे हम कहते हैं कि

ईश्वरीय दूत हज़रत ईसा मसीह मृत व्यक्ति को जीवित कर देते थे किंतु वास्तव में यह काम ईश्वर का होता था और वे केवल साधन थे।

ईश्वरीय दूतों की सत्यता प्रमाणित करने वाले असाधारण कार्य की एक अन्य विशेषता यह होती है कि

इस प्रकार के असाधारण कार्य का उद्देश्य ईश्वरीय दूतों की सत्यता को प्रमाणित करना होता है इस आधार पर यदि कोई ईश्वरीय दूत कोई ऐसा असाधारण काम करे जिस का उद्देश्य उसकी पैगम्बरी

को सही सिद्ध करना न हो तो उसका यह काम असाधारण कार्य होने और ईश्वर की अनुमति के बाद किये जाने के बावजूद मोजिज़ा नहीं कहा जाएगा।













चमत्कार और उससे संबंधित शंकायें





चमत्कार के संदर्भ में कुछ शंकाएं प्रस्तुत की जाती हैं जिनमें कुछ का यहां पर हम वर्णन और उनका निवारण पेश कर रहे हैं।

पहली शंका यह पेश की जाती है कि हर भौतिक प्रक्रिया के लिए विशेष कारक की आवश्यकता होती है जिसे वैज्ञानिक प्रयोगों द्वारा समझा जा सकता है अब यदि कोई ऐसी प्रक्रिया नज़र आये

जिसके कारक का ज्ञान न हो तो उसे असाधारण प्रक्रिया उसी समय तक कहा जा सकता है जब तक उसके कारक का पता न चला हो किंतु कारक का ज्ञान न होना इस अर्थ में नहीं है कि
उसका कोई कारक ही नहीं क्योंकि यदि हम यह स्वीकार कर लेते हैं कि चमत्कार के कारक का कभी पता ही नहीं लगाया जा सकता है तो इसका अर्थ यह होगा कि हम कारक व परिणाम के मूल सिद्धांत का इन्कार कर रहे हैं। अर्थात इस शंका के अंतर्गत यह कहा जाता है कि चमत्कार इसलिए असाधारण होता है क्योंकि उसके कारक का ज्ञान नहीं होता किंतु जब उसके कारक का भौतिक प्रयोगों द्वारा ज्ञान हो जाए तो फिर व चमत्कार नहीं रह जाता।

इस शंका का उत्तर इस प्रकार दिया जा सकता है कि कारक व परिणाम के सिद्धान्त का अर्थ केवल यह होता है कि हर प्रक्रिया व परिणाम के लिए एक कारक की आवश्यकता होती है

किंतु इसका अर्थ कदापि यह नहीं है कि निश्चित रूप से उस कारक का ज्ञान होना भी आवश्यक है। अर्थात यदि हम यह कहें कि चमत्कार या असाधारण कार्य के कारण को प्रयोगशालाओं में

पहचाना नहीं जा सकता तो यह बात कारक व परिणाम के सिद्धान्त के विरुद्ध नहीं होगी क्योंकि यह तार्किक सिद्धान्त है कि किसी विषय का ज्ञान न होने का अर्थ यह नहीं है कि

उसका अस्तित्व ही नहीं है। यूं भी प्रयोगशाला में केवल भौतिक कारकों का ही पता लगाया जा सकता है किंतु भौतिकता से परे विषयों का ज्ञान किसी भी प्रकार से प्रयोगशालाओं में

प्रयोग द्वारा नहीं समझा जा सकता।

इसके अतिरिक्त चमत्कार के बारे में यह भी कहना सही नहीं है कि वह उसी समय तक चमत्कार रहेगा जब तक उसके कारकों का ज्ञान न हो क्योंकि यदि उन कारकों को

भौतिक साधनों से पहचानना संभव होता तो फिर वह असाधारण कार्य भी सामान्य व साधारण भौतिक प्रक्रियाओं की भांति होते और उसे किसी भी स्थिति में

असाधारण कार्य नहीं कहा जा सकता और यदि उसके कारकों का ज्ञान असाधारण रूप से हो तो फिर वह भी मोजिज़ा होगा।

चमत्कार पर एक शंका यह की जाती है कि पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद लोगों द्वारा मोजिज़े व चमत्कार दिखाने की मांगों को प्रायः अस्वीकार कर दिया करते थे तो यदि

मोजिज़ा और चमत्कार पैग़म्बरी सिद्ध करने का साधन है कि तो वे ऐसा क्यों करते थे? इस शंका के उत्तर में हम यह कहेंगे कि वास्तव में बहुत से ऐसे लोग थे जो

पैग़म्बरे इस्लाम द्वारा मोजिज़े के प्रदर्शन और हर प्रकार से अपनी पैग़म्बरी के प्रमाण प्रस्तुत किये जाने के बाद भी बार- बार मोजिज़े और चमत्कार की मांग करते थे

और उनमें ज्ञान और विश्वास प्राप्त करने की भावना नहीं होती थी इसी लिए यह कदापि आवश्यक नहीं है कि हर ईश्वरीय दूत लोगों की मांगों पर किसी बाज़ीगर की भांति चमत्कार दिखाने लगे

बल्कि जब आवश्यक होता है तब ईश्वरीय दूत चमत्कार दिखाता है। इसी लिए यदि हम आज के युग में कोई असाधारण काम देखें तो उसे मोजिज़ा या चमत्कार

उस अर्थ में नहीं कह सकते जिसका वर्णन हमने अपनी आज की और पिछली चर्चाओं में की है।

वास्तव में मोजिज़ा पैग़म्बरों की पैग़म्बरी सिद्ध करने का साधन होता है और अतीत के जिन ईश्वरीय दूतों ने मोजिज़ा या विशेष अर्थ में चमत्कार का प्रदर्शन किया है वह उनके समाज की

परिस्थितयों के अनुकूल रहे हैं उदाहरण स्वरूप हज़रत मूसा, जिन्हें यहूदी, ईसाई और मुसलमान ईश्वरीय दूत मानते हैं जिस काल में थे उसमें जादू का अत्यधिक चलन था और उन्हें

पराजित करने के लिए मिस्र के शासक फिरऔन ने जिसके बनाए हुए पिरामिड आज के लोगों के आकर्षण का केन्द्र हैं, जादूगरों को बुलाया था। इसी लिए हजऱत मूसा को ऐसा चमत्कार दिया गया था

जो जादूगरों को असमर्थ करने की क्षमता रखता था या हज़रत ईसा का उदाहरण पेश किया जा सकता है। उनके काल में चिकित्सकों का अत्यधिक सम्मान था इसी लिए उन्हें ऐसा चमत्कार दिया गया

जो चिकित्सकों के सामर्थ में नहीं था। या फिर पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैही व आलेही व सल्लम के काल में साहित्य को अत्याधिक महत्व प्राप्त था और अरब दूसरी भाषा

बोलने वाले सभी लोगों को गूंगा कहते थे इस काल में ईश्वर ने उन्हें क़ुरआन जैसा मोजिज़ा प्रदान किया जिसमें बार- बार साहित्यकारों को चुनौती दी गयी है कि वह उस जैसी या

उसके किसी एक अंश जैसी रचना करें।

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नोट:इस को हमनें www.al-shia.orgसे नकल (कापी) किया है। थोड़े से हस्तक्षेप के साथ।