अक़ायदे नूर
 

सोलहवाँ सबक़

पैग़म्बरे इस्लाम (स) का सबसे बड़ा मोजिज़ा
तमाम उलमा ए इस्लाम इस बात पर मुत्तफ़िक़ हैं कि पैग़म्बरे इस्लाम (स) का सबसे बड़ा मोजिज़ा क़ुरआने मजीद है इस लिये कि:

1. क़ुरआन एक ऐसा अक़्ली मोजिज़ा है जो लोगों की रूह व फ़िक्र के मुताबिक़ है।

2. क़ुरआन हमेशा बाक़ी रहने वाला मोजिज़ा है।

3. क़ुरआन एक ऐसा मोजिज़ा है जो चौदह सदियों से आवाज़ दे रहा है कि अगर तुम कहते हो कि यह किताब, ख़ुदा की तरफ़ से नाज़िल नही हुई है तो उसके जैसी किताब लाकर दिखाओ।

क़ुरआने मजीद ने अपने मुन्किरों को कई मक़ाम पर चैलेंज किया है, एक जगह इरशाद होता है:

قل لئن اجتمعت الانس والجن علی ان یاتو بمثل هذا القرآن لا یاتون بمثله و لو کان بعضهم لبعض ظهیرا (सूर ए इसरा आयत 88)

‘’कह दो कि अगर तमाम इंसान और जिन मिल जुल कर इस बात पर तैयार हो जायें कि इस क़ुरआन जैसी किताब ले आयें तो वह उसके जैसा नही ला सकते। अगरचे वह एक दूसरे की मदद ही क्यों न करें।’’

दूसरे मक़ाम पर क़ुरआने मजीद अपने उस चैलेंज को आसान बना कर पेश करता है:

فاتو بعشر سور مثله مفتریات وادعو من استطعتم من دون الله ان کنتم صادقین (सूर ए हूद आयत 13)

‘’तो तुम उसके जैसे दस सूरह ले आओ और ख़ुदा के अलावा जिसको चाहो मदद के लिये बुला लो अगर तुम अपने दावे में सचे हो।’’

फ़िर क़ुरआन ने एक जगह चैलेंज को और आसान कर दिया , इरशाद होता है:

و ان کنتم فی ریب مما نزلنا علی عبدنا فاتو بسورة من مثله (सूर ए बक़रा आयत 21)

‘’अगर तुमको इस उसमें शक व शुबहा है जो हमने अपने बंदे पर नाज़िल किया है तो उसके जैसा एक सूरह ही ले आओ।’’

क़ुरआन में इतने चैलेंजों का आना इस बात की तरफ़ इशारा करता है कि अगरचे पैग़म्बरे इस्लाम (स) को बहुत से दूसरे मोजिज़े भी अता किये गये थे लेकिन उन्होने अपनी हक़्क़ानियत को साबित करने के लिये क़ुरआन के इजाज़ पर ही सबसे ज़्यादा तकिया किया है।



वलीद बिन मुग़ीरा का क़िस्सा

जिन लोगों को क़ुरआने मजीद ने चैलेंज किया था उसमें से एक वलीद बिन मुग़ीरा था जो उस ज़माने में अरब के दरमियान फ़िक्र व तदब्बुर के लिहाज़ से बहुत मशहूर था । एक दिन उसने पैग़म्बरे इस्लाम (स) से कहा कि क़ुरआन की चंद आयात पढ़िये, हुज़ूरे अकरम (स) ने सुर ए ‘’हाम मीम सजदा’’ की चंद आयतों की तिलावत फ़रमाई, उन आयतों ने वलीद के अंदर ऐसा असर किया कि वह बे इख़्तियार अपनी जगह से उठा और ‘’क़बील ए बनी मख़ज़ूम’’ की एक नशिस्त में पहुँचा औऱ कहने लगा कि ख़ुदा की क़सम मोहम्मद (स) से ऐसा कलाम सुना है जो न इंसानों जैसा कलाम है और न परियों जैसा... फ़िर उसने कहा: उनकी गुफ़्तार में एक ख़ास मिठास और मख़सूस जमाल है, उसकी बुलंदी फलदार दरख़त की तरह और उसकी बुनियाद मोहकम है, वह एक ऐसा कलाम है जो हर कलाम पर ग़ालिब रहेगा और उस पर कोई ग़ालिब न हो पायेगा ।

यह बात सुनकर सब हैरान रह गये और सब कहने लगे कि वलीद मोहम्मद (स) पर फ़िदा हो गया है लेकिन वलीद ने कहा क्या तुम समझते हो मोहम्मद (स) दीवाने हैं? आज तक उन पर कभी दीवानगी के आसार दिखाई दिया हैं? लोगों ने कहा: नही! फिर वलीद ने पूछा: क्या तुम यह तसव्वुर करते हो कि मोहम्मद (स) झूठे? हैं क्या आज तक तुम्हारे दरमियान वह सदाक़त व अमानत में मशहूर नही हैं?! क़ुरैश के सरदारों ने कहा तो फिर हम उनकी तरफ़ कौन सी निस्बत दें? वलीद ने कुछ देर सोचने के बाद कहा हम यह कहते हैं कि वह ‘’जादूगर’’ हैं।

क़ुरैश ने यह बात सारे अरब में फैला दी कि मोहम्मद (स) जादूगर हैं उनकी आयात जादू हैं उनसे दूरी इख़्तियार करो और उनकी बातों को न सुनो लेकिन उनकी तमाम कोशिशें नाकाम हो गयीं, हक़ीक़त के तिशना अफ़राद जूक़ दर जूक़ क़ुरआन के दामन में पनाह लेने लगे और इस असमानी पैग़ाम से सैराब होने लगे, दुश्मनों को शिकस्ते फ़ाश का सामना करना पड़ा।

आज भी क़ुरआन दुनिया वालों को चैलेंज कर रहा है कि ऐ फ़लसफ़ियों, ऐ अदीबों अगर तुम उम आयात की हक़्क़ानियत के बारे में शक करते हो तो उसका जवाब लाओ!!

यहूदियत व ईसाईयत, इस्लाम और क़ुरआन के ख़िलाफ़ हर पर साल करोड़ो डाँलर ख़र्च कर रही है लेकिन हम कहते हैं कि इतना ख़र्च करने की जगह तुम क़ुरआन का चैलेंज मान लो और इस क़ुरआन के किसी एक सूरह का भी जवाब ले आओ।



ख़ुलासा

-क़ुरआने मजीद, रसूले इस्लाम का सबसे बड़ा मोजिज़ा है इस लिये कि वह लोगों की रूह व फ़िक्र से साज़गार और हमेशा बाक़ी रहने वाला है, उसने अपने मुनकिरों को चैलेंज किया है कि उसका मिस्ल ला कर दिखाओ!

-क़ुरआन में कई मक़ाम पर मुनकिरों को चैलेंज किया किया है और सबसे आसान शक्ल में अपना चैलेंज पेश करते हुए कहा है कि सिर्फ़ एक सूरह ही लाकर दिखाओ।

-आज भी क़ुरआन दुनिया वालों को चैलेंज कर रहा है कि अगर तुम्हें इसकी आयतो के बारे में शक है तो उसकी मिसाल ला कर दिखाओ।
सवालात

1. क़ुरआने मजीद रसूले अकरम (स) का सबसे बड़ा मोजिज़ा क्यों है?

2. अपने मुनकिरों के लिये क़ुरआने मजीद का सबसे असान चैलेंज कौन सा है ?

3. क्या कुरआन आज भी अपने मुनकिरों को चैलेंज कर रहा है?