अक़ायदे नूर
 
गयारहवाँ सबक़

अद्ल

उसूले दीन में अद्ल को तौहीद के बाद शुमार किया जाता है। अद्ल से मुराद यह है कि अल्लाह आदिल (इंसाफ़ वाला) है और किसी पर ज़ुल्म नही करता। ख़ुदा वंदे आलम अद्ल, नबुव्वत, इमामत, क़यामत, जज़ा (ईनाम) व सज़ा, अहकाम की हिकमतों और तमाम कामों से मुतअल्लिक़ है लिहाज़ा अगर ख़ुदा के अदल को न माना जाये को बहुत से इस्लामी मसायल हल नही हो पायेगें।
अदले ख़ुदा का मतलब

अद्ले ख़ुदा के बहुत से मअना बयान हुए हैं जिन में से बाज़ यह हैं:

1. ख़ुदा आदिल है यानी वह हर ऐसे काम से पाक है जो मसलहत और हिकमत के बर ख़िलाफ़ हो।
2. ख़ुदा आदिल है यानी उस की बारगाह में तमाम इंसान बराबर हैं और अमीर ग़रीब, गोरे काले, आलिम जाहिल, वग़ैरह सब एक जैसे हैं, बड़ाई का पैमाना और मेयार सिर्फ़ तक़वा और परहेज़गारी है। क्यो कि क़ुरआने मजीद में इरशाद होता है:

ان اکرمکم عندالله اتقاکم

बेशक ख़ुदा के नज़दीक तुम में से सब से ज़्यादा इज़्ज़त और फ़ज़ीलत वाला वह है जो सब से ज़्यादा मुत्तक़ी (परहेज़गार) हो। (सूर ए हुजरात आयत 13)

3. ख़ुदा आदिल है यानी किसी के ज़र्रा बराबर अमल को भी बेकार नही जाने देता। क़ुरआने मजीद में इरशाद है: فمن یعمل مثقال ذرة خیرا یره ومن یعمل مثقال ذرة شرا یره

जो ज़र्रा बराबर भी नेकी करेगा उस की जज़ा (ईनाम) पायेगा और जो ज़र्रा बराबर भी बुराई करेगा उस की सज़ा पायहगा।

अदले ख़ुदा की दलील

ख़ुदा आदिल है और वह ज़ुल्म नही करता। इस लियह कि ज़ुल्म एक बुरा काम और ऐब है और ख़ुदा हर ऐब से पाक है, दूसरी बात यह कि ज़ुल्म करने के बहुत से सबब (कारण) होते हैं जिन में से एक भी ख़ुदा में नही पाया जाता और वह असबाब (कारण) यह हैं:

1. जिहालत: ज़ुल्म वह करता है जो उस की बुराई को न जानता हो जब कि ख़ुदा हर चीज़ के बारे में जानता है।
2. ज़रुरत: ज़ुल्म वह करता है जो किसी चीज़ का मोहताज हो और उस चीज़ को हासिल करने के लियह उसे ज़ुल्म का सहारा लेना पड़े। लेकिन ख़ुदा किसी चीज़ का मोहताज नही है।
3. आजिज़ी: ज़ुल्म वह करता है जो ख़ुद से किसी ख़तरे को टालने में बेबस हो और आख़िर कार उसे ज़ुल्म का सहारा लेना पड़े। लेकिन ख़ुद आजिज़ और बेबस नही है बल्कि हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है।
4. बद अख़लाक़ी: ज़ुल्म वह करता है जो बुरा अख़लाक़ रखता हो और अपने दिल में किसी की दुश्मनी लिये बैठा हो या किसी से जलता हो लेकिन ख़ुदा इन सब बुराईयों से पाक है।

इन ही चार असबाब में से किसी एक सबब की बुनियाद पर दुनिया में ज़ुल्म होते हैं लेकिन ख़ुदा वंदे आलम में इन में से एक सबब भी नही पाया जाता लिहाज़ा साबित हो जाता है कि ख़ुदा वंदे आलम ज़ालिम नही बल्कि आदिल (इंसाफ़ वाला) है।

ख़ुलासा

-अल्लाह तआला आदिल (न्याय प्रिय) है और किसी पर ज़ुल्म नही करता।

-ख़ुदा के अद्ल का मतलब यह है कि वह तमाम काम मसलहत व हिकमत की बुनियाद पर करता है, उस की नज़र में सारे इंसान बराबर है।

-दुनिया में ज़ुल्म के चार असबाब हैं: जिहालत, ज़रुरत, आजिज़ी (बेबसी), बद अख़लाक़ी, लेकिन ख़ुदा वंदे आलम में इन में से कोई एक सबब भी नही पाया जाता लिहाज़ा साबित हो जाता है कि ख़ुदा आदिल (इंसाफ़ वाला) है। सवालात

1. अदले ख़ुदा के कम से कम दो मअना बयान करें?
2. अदले ख़ुदा की क्या दलील है?