ज्ञान का सही मार्ग
 

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मुमकिनुल वुजूद या संभव व निर्भर अस्तित्व उस अस्तित्व को कहते हैं जिसका अस्तित्व स्वयं उसके ऊपर टिका नहीं होता बल्कि उसके लिए किसी दूसरे कारक की आवश्यकता होती है।



इस प्रकार की दशाओं को कल्पना के आधार पर वर्णित किया गया है। बौद्धिक दृष्टि से असंभव अस्तित्व का होना तो संभव नहीं है



जैसे तीन की संख्या का चार से बड़ा होना संभव नहीं है किंतु कोई कारण नहीं है कि



सृष्टि के अन्य अस्तित्वों में से अनिवार्य व संभव अस्तित्व की पहचान हो सके। दूसरे शब्दों में इसके लिए तीन दशाएँ हो सकती हैं।



या यह कि जितने अस्तित्व हैं सबके सब आवश्यक और अनिवार्य हों, या यह कि सारे अस्तित्व संभव हों और तीसरे यह कि कुछ अस्तित्व संभव हों और कुछ अनिवार्य।



पहली व तीसरी दशा के आधार पर अनिवार्य अस्तित्व का होना सिद्ध होता है। इस लिए अब इस दशा पर विचार किया जाना चाहिए कि क्या यह संभव है कि



सारे अस्तित्व संभव हों या नहीं? या फिर इस विचार को रद्द करने के बाद एक अनिवार्य अस्तित्व का होना सिद्ध होता है।



भले ही उसके अन्य गुणों और विशेषताओं के लिए दूसरे तर्कों की आवश्यकता हो।



इस आधार पर दूसरी दशा को ग़लत सिद्ध करने के लिए हमें एक अन्य भूमिका का वर्णन करना होगा।



वह भूमिका यह है कि सारे अस्तित्व का मुमकेनुल वुजूद अर्थात संभव व निर्भर अस्तित्व होना बौद्धिक दृष्टि से असंभव है क्योंकि



संभव अस्तित्व के लिए किसी कारक की आवश्यकता होती है।



कारकों में कभी समाप्त न होने वाला क्रम बौद्धिक दृष्टि से अस्वीकार्य है तो फिर यह कारकों का क्रम किसी ऐसे अस्तित्व पर जाकर थम जाना चाहिए जो संभव



अस्तित्व न हो और उसे अपने अस्तित्व के लिए किसी कारक की आवश्यकता न हो अर्थात वाजिबुल वुजूद या अनिवार्य अस्तित्व हो।



जब चर्चा यहाँ तक पहुँचती है तो फिर दर्शनशास्त्र के कुछ दूसरे विषयों का उल्लेख भी आवश्यक हो जाता है।



यदि किसी अस्तित्व को दूसरे की आवश्यकता हो और उसका अस्तित्व एक प्रकार से दूसरे अस्तित्व पर टिका हो तो



दर्शनशास्त्र में ज़रूरत रखने वाले अस्तित्व को परिणाम और दूसरे को कारक कहते हें किंतु कारक के लिए यह भी संभव है कि वह बिल्कुल



आवश्यकता मुक्त न हो बल्कि स्वयं उसे भी किसी अन्य कारक की आवश्यकता हो किंतु यदि कोई ऐसा कारक हो जिसे किसी अन्य कारक की आवश्यकता न हो तो



वह महाकारक होगा और उसे किसी भी अन्य अस्तित्व की आवश्यकता नहीं होगी।