ज्ञान का सही मार्ग
 

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ईश्वर को पहचानने के सबसे सरल मार्ग की कुछ विशेषताएं इस प्रकार हैं।



इस मार्ग पर चल कर ईश्वर को पहचानने के लिए जटिल व गूढ़ और कठिनाई से समझी जाने वाली भूमिकाओं की आवश्यकता नहीं होती बल्कि अत्यंत



सरल शब्दों में ईश्वर को पहचनवा दिया जाता है जिसका समझना हर वर्ग और स्तर से संबंध रखने वाले व्यक्ति के लिए बहुत सरल होता है।



दूसरा मार्ग वह है जो सीधे रूप से बुद्धिमान व विश्व के रचयिता ईश्वर की ओर जाता है और यह मार्ग दर्शनशास्त्र व वादशास्त्र के विपरीत है



जिनमें पहले किसी ऐसे अस्तित्व की उपस्थिति सिद्ध की जाती है जिसको अपनी उपस्थिति के लिए किसी अन्य अस्तित्व की आवश्यकता नहीं होती



और फिर उसके गुणों और विशेषताओं को अन्य मार्गों से सिद्ध किया जाता है।



तीसरा मार्ग वह मार्ग है जो किसी भी वस्तु से अधिक प्रवृत्ति की चेतना और स्वाभाविक ज्ञान को जगाने का काम करता है



और उसके विभिन्न चरणों पर चिंतन व विचार द्वारा मनुष्य अध्यात्म के उच्च स्थान पर पहुँच जाता है



और वह सांसारिक परिवर्तनों और रचनाओं के पीछे ईश्वर का हाथ देखता है जिसे उसकी प्रवृत्ति भी पहचान रही होती है।



इन्हीं विशेषताओं के कारण धर्मगुरुओं और ईश्वरीय मार्गदर्शकों ने इस मार्ग को आम लोगों के लिए चुना है और उन्हें इस पर चलने का निमंत्रण दिया है



तथा दूसरे मार्गों को विशेष प्रकार के लोगों के लिए विशेष किया है या फिर नास्तिक बुद्धिजीवियों और ईश्वर का इन्कार करने वाले दर्शन शास्त्रियों से बहस के दौरान उसका प्रयोग किया है।