ज्ञान का सही मार्ग
 

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ज्ञान प्राप्ति का आध्यात्मिक और तपस्या का जो मार्ग है जिसमें कुछ लोग तपस्या और साधना के माध्यम से सफल हैं उसके संदर्भ में कहना चाहिए कि यह सबके लिए संभव नहीं है।



आज की चर्चा का सारांश इस प्रकार हैः



सृष्टि के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए सबसे पहले ज्ञात प्रकारों और दृष्टिकोणों के बारे में जानना आवश्यक है



किंतु यह भी निश्चित है कि हर प्रकार का दृष्टिकोण सृष्टि के बारे में पूर्ण जानकारी प्रदान नहीं कर सकता क्योंकि बहुत सी विचारधाराएं और ज्ञान केवल भौतिक तथ्यों तक सीमित होते हैं जबकि



सृष्टि के संपूर्ण ज्ञान के लिए भौतिकता से परे ज्ञान की भी आवश्यकता होती है।



इस लिए सृष्टि के बारे में ज्ञान के लिए किसी भी ईश्वरीय दूत या ग्रंथ की शिक्षाओं को भी प्रमाण नहीं बनाया जा सकता क्योंकि सृष्टि की पहचान के बाद रचयिता की पहचान होती है



और उसकी पहचान प्राप्त करने और उस पर आस्था के बाद उसके दूतों और ग्रंथों पर आस्था होती है और फिर उसकी शिक्षाएं अनुकरणीय बनती हैं। (जारी है)



सृष्टि, ईश्वर और धर्म-9 एवं 10 ईश्वर कैसा है?



हम यह जान चुके हैं कि धर्म का आधार इस सृष्टि के रचयिता के अस्तित्व पर विश्वास है



और भौतिकवादी व ईश्वरीय विचारधारा के मध्य मुख्य अंतर भी इसी विश्वास का होना और न होना है।



इस आधार पर सत्य के खोजी के सामने जो पहली बात आती है और जिसका उत्तर उसके लिए किसी भी



अन्य बात से अधिक आवश्यक होता है वह यह है कि किसी ईश्वर का अस्तित्व है या नहीं?



इस प्रश्न का उत्तर खोजने के लिए सत्य के खोजी को अपनी बुद्धि का प्रयोग करना होगा ताकि निश्चित परिणाम तक पहुँच सके, चाहे वह परिणाम सकारात्मक हो या नकारात्मक।