ज्ञान का सही मार्ग
 


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पिछली चर्चा में यह बताया गया कि मनुष्य को ईश्वर तक पहुंचने के लिए सही मार्ग का चयन करना चाहिए और यह सही मार्ग है धर्म।



अब प्रश्न यह उठता है कि जब मनुष्य धर्म तथा आयडियालोजी की मूल समस्याओं को समझना चाहता तो इसके लिए क्या मार्ग अपनाए?



इस संदर्भ में किस प्रकार के ज्ञान और सूचनाओं को माध्यम बना?



मानवीय ज्ञान को चार प्रकारों में बांटा गया है। एक है प्रयोगिक ज्ञान जिसे विज्ञान कहा जाता है, यह ज्ञान इंद्रियों के माध्यम से प्राप्त होता है।



अर्थात मनुष्य आंखों से देखकर, कानों से सुनकर, त्वचा से छू कर, नाक से सूंघ कर और ज़बान से चख कर कुछ बातों की जानकारी प्राप्त करता है जबकि



बुद्धि भी इस प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाती है।



ज्ञान की दूसरी क़िस्म वो है जो बुद्धि और विवेक के प्रयोग से प्राप्त होती है। यह ज्ञान वस्तुतः वह निष्कर्ष है जो मानव बुद्धि निकालती है।



उदाहरण स्वरूप यह निष्कर्ष निकालना कि दो धन दो बराबर चार होते हैं। इस प्रकार के ज्ञान को तर्क शास्त्र, दर्शन-शास्त्र तथा गणित जैसे विषयों में प्रयोग किया जाता है।