हदीसें
 



पहला भाग


1. اَلدُّنيا أمَدٌ، الآخِرَةُ أبَدٌ;

दुनिया ख़त्म होने वाली है और आख़िरत हमेशा बाक़ी रहने वाली है।

2. اَلتَّواضُعُ يَرفَعُ، اَلتَّكبُّرُ يَضَعُ ;

(दूसरों के) आदर व सत्कार की भावना, (इंसान को) उच्चता प्रदान करती है और घमंड मिट्टी में मिला देता है।

3. اَلظَّفَرُ بِالحَزمِ وَالحَزِمُ بِالتَّجارِبِ;

सफलता दूर दर्शिता से और दूर दर्शिता तजुर्बे से प्राप्त होती है।

4. اَلحازِمُ يَقظانُ، اَلغافِلُ وَسنانُ;

दूर दर्शी जागा हुआ है और ग़ाफिल नींद के प्रथम चरण में है।

5. اَلعِلمُ يُنجيكَ، الجَهلُ يُرديكَ;
ज्ञान आपको बचाता है और ज्ञानता आपका विनाश करती है।

6.اَلعَفوُ أحسَنُ الإحسانِ;

क्षमा, सब से अच्छी नेकी व भलाई है।

7. اَلإنسانُ عَبدُ الإحسانِ;

इन्सान एहसान का गुलाम है।

8.
اَللَّهوُ مِن ثِمارِ الجَهلِ;

व्यर्थ कार्य मूर्खता का परिणाम होते हैं।

9. اَلسَّخاءُ يَزرَعُ المَحَبَّةَ;

सख़ावत (दान) मोहब्बत के बीज बोती है।

10. اَلهَدِيَّةُ تَجلِبُ المَحَبَّةَ;

उपहार मोहब्बत को अपनी तरफ़ खींचता है।
11. اَلمَواعِظُ حَياةُ القُلُوبِ;

नसीहत (सद उपदेश) दिलों की ज़िन्दगी है।

12. اَلعُجبُ رَأسُ الحَماقَةِ;

घमंड, मूर्खता की जड़ है।

13. أخُوكَ مُواسِيَكَ فِي الشِّدَّ

तुम्हारा भाई वह है जो मुशकिल के समय जान व माल से तुम्हारी सहायता करे।

14. اَلعَجَلُ يُوجِبُ العِثارَ;

जल्दी, गल्तियों का कारण बनती है।

15. اَلمَرءُ ابنُ ساعَتِهِ;

आदमी अपने समय की संतान है।

16. اَلحازِمُ مَن دارى زَمانَهُ;

दूर दर्शी वह है जो अपने समय से प्यार करे।

17.اَلمطامِعُ تُذِلُّ الرِّجالَ;

लालच मर्दों को ज़लील करा देता है।

18. اَلمَنُّ يُفِسدُ الإحسانَ;

एहसान जताना, नेकियों को बर्बाद कर देता है।

19. لطَّيشُ يُنَكِّدُ العَيشَ;

"मूर्खता, जीवन को कठिन बना देती है।

20. اَلاِعتِبارُ يُثمِرُ العِصمَةَ

(विभिन्न घटनाओं से) शिक्षा लेना, (गुनाहों से) सुरक्षित रहने का परिणाम है।

21. اَلنَّدمُ عَلَى الخَطيئَةِ يَمحُوها;

(अपनी) ग़लती पर लज्जित होना, गलतियों को ख़त्म कर देता है।

22. اَلغيبَةُ آيَةُ المُنافِقِ;

चुग़ली, मुनाफ़िक़ की पहचान है।

23. اَلقَناعَةُ أهنَأُ عَيش;

क़िनाअत (कम पर खुश रहना), सब से अच्छी ज़िन्दगी है।

24. اَلعُيُونُ مَصائِدُ الشَّيطانِ;

आँखें, शैतान का जाल हैं।

25. اَلمَرءُ مَخبُوءٌ تَحتَ لِسانِهِ;

आदमी अपनी ज़बान के पीछे छिपा होता है।


26. اَلمَرءُ لا يَصحَبُهُ إلاَّ العَمَلُ;

आदमी का उसके कार्यों के अलावा कोई साथी नहीं होता।

27. اَلحَسُودُ لا يَسُودُ;

ईर्ष्यालू को कोई फायदा नहीं होता।

28. اَلاِستِشارَةُ عَينُ الهِدايَةِ;
मशवरा करना, मार्गदर्शन का स्रोत है।

29. اَلبَشاشَةُ حِبالَةُ المَوَدَّةِ;

प्रफुलता, मोहब्बत का जाल है।

30. إضاعَةُ الفُرصَةِ غُصَّةٌ;

फ़ुर्सत को खो देना, दुख का कारण बनता है।

31. اَلحَليمُ مَنِ احتَمَلَ إخوانَهُ;

संयमी वह है जो अपने भाईयों की (गलतियों को) बर्दाश्त करले।

32. اَلكِبرُ مِصيَدةُ إبليسِ العُظمى;

घमंड, शैतान का सब से बड़ा जाल है।

33. اَلمُحسِنُ مَن صَدَّقَ أقوالَهُ أفعالُهُ;

नेक वह है, जिसके काम, उसकी बात को सत्यापित करें।

34. إظهارُ التَّباؤُسِ يَجلِبُ الفَقرَ;

परेशानियों को ज़ाहिर करना, फ़क़ीरी लाता है।

35. اَلمُعينُ عَلَى الطّاعَةِ خَيرُ الأصحابِ;

सब से अच्छे साथी वह हैं जो (अल्लाह की) आज्ञा पालन में मदद करें।

36. اَلغِنى وَالفَقرُ يَكشِفانِ جَواهِرَ الرِّجالِ وَأوصافَها;

समृद्धता और निर्धनता, दोनों ही मर्दों के जौहरों और विशेषताओं को प्रकट कर देती हैं।

37. اَلسُّكُوتُ عَلَى الأحمَقِ أفضَلُ جَوابِهِ;

जाहिल के सामने चुप हो जाना उसका सब से अच्छा जवाब है।

38. اَلسّامِعُ لِلغيبَةِ كَالمُغتابِ;

चुग़ली सुनने वाला, चुग़ली करने वाले के समान है।

39. اَلجَمالُ الظّاهِرُ حُسنُ الصُّورَةِ، اَلجَمالُ الباطِنُ حُسنُ السَّريرَةِ;

बाह्य ख़ूबसूरती अच्छी शक्ल में और आन्तरिक ख़ूब सूरती अच्छे व्यक्तित्व में निहित है।

40. آلَةُ الرِّیاسَةِ سِعَةُ الصَّدرِ;

सत्ता का यन्त्र, सीने का बड़ा होना है, अर्थात जो सबको अपने सीने से लगाता है, वही सत्ता पाता है।

41. أوَّلُ العِبادَةِ اِنتِظارُ الفَرَج بِالصَّبرِ;

सब्र के साथ आराम मिलने का इन्तेज़ार करना, सब से अच्छी इबादत है।

42. اَلبُخلُ بِالمَوجُودِ سُوءُ الظَّنِّ بِالمَعبودِ;

मौजूद चीज़ के बारे में कंजूसी करना, माबूद पर बद गुमानी करना है।

43. اَلغِشُ مِن أخلاقِ اللِّئامِ;

धोखेबाज़ी, नीच लोगों का व्यवहार है।

44. َالأيّامُ تُوضِحُ السَّرائِرَ الكامِنَةَ;

समय, छुपे हुए भेदों को खोल देता है।

45. اَلعَجَلُ قَبلَ الإمكانِ يُوجِبُ الغُصَّةَ;

(किसी काम को करने के लिए उसके) साधनों (की छान बीन करने) से पहले (उसमें) जल्दी करना, दुख का कारण बनता है।

46. اَلتَّوَدُّدُ إلَى النّاسِ رَأسُ العَقلِ;
लोगों से मोहब्बत करना, अक्लमंदी की जड़ है।

47. اَلمُجاهِدُونَ تُفتَحُ لَهُم أبوابُ السَّما

मुजाहिदों (धर्मयोधाओं) के लिये आसमान के दरवाज़े खोल दिये जाते हैं।

48. اَلتَّوبَةُ تُطَهِّرُ القُلُوبَ وَتَغسِلُ الذُّنُوبَ;

तौबा, दिलों को पाक करती है और गुनाहों को धो डालती है।

49. الَغضَبُ يُفسِدُ الألبابَ وَيُبعِدُ مِنَ الصَّوابِ;

ग़ुस्सा, अक्ल को खराब और (इंसान को) सही रास्ते से दूर करता है।

50. إدمانُ الشَّبَعِ يُورِثُ أنواعَ الوَجَعِ;

हर वक्त पेट का भरा रहना, तरह तरह के दुखों को जन्म देता है।