वीरता व भाईचारे के प्रतीक हज़रत अब्बास(अ)
 



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इतिहास में है कि एक दिन हज़रत अब्बास बचपन में इस प्रकार हाथ में पानी भरा कूज़ा लिए थे कि पानी उनके शरीर पर छलक कर गिर रहा था।

हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने जब यह दृष्य देखा तो पूछा कि ये पानी किसके लिए ले जा रहे हो? हज़रत अब्बास ने कहा कि इस बार अपने भाई हुसैन के लिए ले जा रहा हूं।

हज़रत अली एक क्षण सोच कर रोने लगे और हज़रत अब्बास को संबोधित करते हुए कहाः तुम कर्बला में भी यही काम मेरे बेटे के लिए करोगे जबकि प्यासे होगे और प्यासे ही शहीद हो जाओगे।

हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम सदैव भाई के स्थान का सम्मान करते थे।

आशूर की रात जब शत्रु के सिपाही इमाम हुसैन और उनके साथियों से युद्ध के लिए तैयार हो गए तो इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने हज़रत अब्बास से कहाः प्रिय भाई!

मेरा प्राण तुम पर न्योछावर हो जाए! घोड़े पर सवार होकर इस अत्याचारी गुट के पास जाओ और पूछो कि यह हमसे क्या चाहते हैं?

आशूर के दिन हज़रत अब्बास फ़ुरात नदी के किनारे पहुंचे ताकि इमाम हुसैन के प्यासे बच्चों के लिए पानी ले जाएं।

किन्तु जब पलटने लगे तो शत्रुओं ने उन्हें चारो ओर से घेर लिया और उन पर आक्रमण कर दिया। उनके हाथ कट गए और वे घोड़े से ज़मीन पर आ गए।

उस समय इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहाः अब मेरी पीठ टूट गई और आशा समाप्त हो गई।

इस्लाम और पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों के मत में बलिदान, त्याग व वीरता को सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया गया है।

हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने कठिनाइयों में त्याग व बलिदान को सर्वश्रेष्ठ नैतिक गुण की संज्ञा दी है।

एक स्थान पर त्याग व बलिदान को सर्वश्रेष्ठ उपासना की संज्ञा दी गई है और त्याग व बलिदान को समस्त नैतिक गुणों का उद्देश्य बताया गया है।

हज़रत अली अलैहिस्सलाम हारिस हमेदानी के नाम अपने पत्र में फ़रमाते हैं कि सबसे बड़ा मोमिन अन्य मोमिनों की तुलना में अपने व अपने परिजनों के प्राण व संपत्ति का अधिक

परित्याग करता है। हज़रत अली अलैहिस्सला के इस कथन का स्पष्ट उदाहरण हज़रत अब्बास का जीवन है।

वे उन श्रेष्ठ मोमिनों में हैं जिन्होंने अंतर्दृष्टि व परिज्ञान के साथ धर्म व इस्लाम के महालक्ष्यों के लिए प्राण की बाज़ी लगा कर परिपूर्णता का मार्ग तय करते हुए शहादत जैसे उच्च लक्ष्य तक पहुंचे।