वीरता व भाईचारे के प्रतीक हज़रत अब्बास(अ)
 



(3)

पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम का कथन हैः मोमिन आपस में एक दूसरे के भाई समान हैं और उनकी दियत अर्थात किसी का प्राण लेने या उसे शारिरिक हानि

पहुंचाने के बदले में हर्जाना एक समान है और वे शत्रु के सामने एक समूह की भांति होते हैं।

पवित्र क़ुरआन की दृष्टि में भाईचारा, ईमान और उस प्रेम पर आधारित होता है जो ईश्वर मोमिनों के हृदय में डाल देता है।

इसलिए कठिनाइयों में एक दूसरे की सहायता करना ईमान वालों का एक दूसरे के प्रति सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य है।

पैग़म्बरे इस्लाम ने मोमिनों को एक शरीर के अंग की संज्ञा दी है कि यदि एक अंग में पीड़ा हो तो दूसरे अंग चैन से नहीं होंगे और यदि एक अंग में रोग हो तो पूरा शरीर ज्वर में तपने लगता है।

हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम के जीवन पर एक संक्षिप्त सी दृष्टि उन्हें भाईचारे का प्रतीक सिद्ध करती है।

उन्होंने अपने बचपन से अपने भाइयों के प्रति उन कर्तव्यों को सर्वश्रेष्ठ ढंग से निभाया जिनका क़ुरआन और पैग़म्बरे इस्लाम ने उल्लेख किया है।