वीरता व भाईचारे के प्रतीक हज़रत अब्बास(अ)
 



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ज़रत अब्बास पर ईश्वर की विशेष कृपा यह थी कि वे उदारता व सुचरित्रता के साथ सुंदर व आकर्षक भी थे।

उनका चेहरा खिला रहता और उनकी काठी लंबी और शरीर ठोस था जिससे वीरता झलकती थी। इतिहासकारों ने उन्हें बहुत सुंदर व आकर्षक बताया है।

उन्हें सुंदर व प्रतापी चेहरे के कारण हाशिम के चांद की उपाधि दी गई।

इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम ने जिन्हें उपासको सरदार कहा जाता है, हज़रत अब्बास के बारे में फ़रमाया हैः ईश्वर हज़रत अब्बास पर कृपा करे उन्होंने त्याग व बलिदान दिया और परीक्षा में

सफल हुए। स्वंय पर भाई पर न्योछावर कर दिया यहां तक कि उनके हाथ कट गए, ईश्वर के निकट वह स्थान है कि प्रलय के दिन सभी शहीद उनके स्थान की प्राप्ति की कामना करेंगे।

इमाम जाफ़रे सादिक़ अलैहिस्सलाम ने भी हज़रत अब्बास की प्रशंसा करते थे और आशूर के दिन उनके गौरवपूर्ण व वीरता भरे क़दम पर श्रृद्धांजलि अर्पित करते थे।

उस अदम्य प्रतिरोध की इन शब्दों में उल्लेख किया हैः हमारे चाचा अब्बास बिन अली के पास गहरी अंतर्दृष्टि व समझदारी तथा ठोस ईमान था।

इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के साथ जेहाद किया और परीक्षा में सफल हुए तथा संसार से शहीद होकर चले गए।

इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम हज़रत अब्बास के स्थान की इस प्रकार प्रशंसा की हैः हे अमीरुल मोमेनीन के सुपुत्र आप पर सुबह शाम ईश्वर और उसके समीपवर्ती फ़रिश्तों की कृपा तथा उसके दूतों,

नेक बंदों व समस्त शहीदों तथा सत्य के मार्ग पर चलने वालों का सलाम हो।

इतिहास में ऐसे व्यक्ति मौजूद हैं जिन्हें उनके एक या कई महत्वपूर्ण क़दम के कारण आदर्श माना गया है। हज़रत अब्बास वीरता व भाईचारे के प्रतीक हैं।

पवित्र क़ुरआन में मोमिनों के बीच उनके ईमानी बंधुत्व की ओर संकेत किया गया है। क़ुरआन की दृष्टि में एक आदर्श समाज के गठन के लिए सबसे उपयोगी मार्ग ईमानी बंधुत्व है

जिसके कारण वे एक दूसरे के साथ होते हैं और एक ही दिशा में क़दम बढ़ाते हैं।