पैग़म्बरे इस्लाम(स)की नवासी हज़रत ज़ैनब(अ)
 



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एक वरिष्ठ मोहद्दिसा (अर्थात पैग़म्बरे इस्लाम (स) के कथन बयान करने वाली) के रूप में उनकी बातों को हदीस की बहुत सी पुस्तकों मे लिखा गया है।



उदाहरण स्वरूप "मन ला यहज़ोरोहुल फ़क़ीह" "वसाएलुश्शीया" तथा "बेहारुल अनवार" जैसी पुस्तकों और विश्वसनीय स्रोतों में हज़रत ज़ैनब द्वारा बयान की गई हदीसें मिलती हैं।



उन्होंने इन हदीसों को अपने पिता हज़रत अली, (अ) माता, हज़रत फ़ातेमा (स) और अपने भाइयों से सुनकर दूसरों को बताया था।



इस महान महिला की ज्ञान संबन्धी श्रेष्ठता इस सीमा तक थी कि पवित्र क़ुरआन के महान व्याख्याकार इब्ने अब्बास जब भी लोगों के बीच हज़रत ज़ैनब के हवाले से कोई बात कहना चाहते थे तो



वे इस प्रकार कहा करते थे कि हमारी बुद्धिमान ज़ैनब (स) ने यह कहा है। हज़रत ज़ैनब के लिए अक़ीला अर्थात बुद्धिमान की उपाधि उस समय इतनी प्रसिद्ध हो गई थी कि



लोग उनके बेटों को भी "बनी अक़ीला" अर्थात बुद्धिमान महिला की संतान कहा करते थे।



करबला में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत के पश्चात करबला, कूफ़ा और शाम में दिये गए उनके भाषण, जिनमें उन्होंने तत्कालीन अत्याचारियों को संबोधित किया था,



उनके ज्ञान और उनकी प्रवीणता को दर्शाते हैं। उनके भीतर इसी प्रकार भाषण सामर्थ्य के अतिरिक्त एसे सूक्ष्म व मूल बिंदु पाए जाते हैं जो संवेदनशील समय में



निर्णय लेने व नीति निर्धारण की में उनकी क्षमता की ओर संकेत करते है। यह विषय उनकी बुद्धिमानी और दूरदर्शिता के साथ ही साथ अवसर को पहचानने का भी परिचायक है।



हज़रत ज़ैनब में पाई जाने वाली अलौकिक व आध्यात्मिक विशेषताओं में एकांत में ईश्वर की उपासना जैसी विशेषता बहुत स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।



दायित्वों के निर्वाह और इस्लामी शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से ईश्वर के मार्ग में संषर्घ एवं पलायन तथा माता-पिता और भाइयों का साथ देना



आदि जैसी बातों के कारण उनके पूरे जीवन को ही उपसना कहा जा सकता है। समस्त निर्णय, पलायन और यात्राएं, संघर्ष एवं अन्याय के विरुद्व आवाज़ उठाने जैसी



समस्त बातें ईश्वर के लिए किये जाने वाले उनके कार्य थे। यह महान महिला रातों को पवित्र क़ुरआन का पाढ करने और नमाज़े शब अर्थात रात्रि की विशेष उपासना करने में व्यतीत करती थीं।



करबला की त्रासदी के पश्चात हर प्रकार के दुख-दर्द को सहन करने और थकन से निढाल होने के बावजूद उन्होंने कभी भी नमाज़े शब पढ़ना नहीं छोड़ा।



इस संबन्ध में इमाम ज़ैनुल आबेदीन कहते हैं कि कूफ़े से शाम के रास्ते में मेरी फुफी ज़ैनब, सभी नमाज़ों को पढ़ती थीं



भूख तथा अत्याधिक कम़ज़ोरी के कारण वे कभी बैठकर नमाज़ें पढ़ने पर विवश थीं।



करबला और उसके बाद की दुखद घटनाओं के बावजूद हज़रत ज़ैनब, ईश्वर की उपासना के मार्ग से बिल्कुल पीछे नहीं हटीं और उन्होंने कभी भी इन बातों पर अपनी अप्रसन्नता व्यक्त नहीं की।



वे जो कुछ भी कहती थीं वह ईश्वर की प्रसन्नता प्राप्ति के लिए कहती थीं।



उन्होंने कूफ़े के अत्याचारी शासक इब्ने ज़ियाद के प्रश्न के उत्तर में कहा था कि मैंने करबना में सुन्दरता के अतिरिक्त कुछ नहीं देखा।



उनका यह वाक्य, एकेश्वरवाद में उनकी आस्था के उच्च स्तर, ईश्वर की गूढ़ पहचान, ईश्वर से निकटता और ईश्वर की दासता को चित्रित करता है।



हज़रत ज़ैनब के व्यक्तित्व की एक अन्य विशेषता, धैर्य है। मनुष्य का जीवन भौतिक एवं आध्यात्मिक समस्याओं का मिश्रिण है।



यदि व्यक्ति अपनी आंतरिक इच्छाओं के मुक़ाबले में प्रतिरोध न करे तो फिर वह कभी भी अपनी भौतिक एवं आध्यात्मिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उचित मार्ग प्राप्त नहीं कर सकता।



निर्धनों की सहायता भी हज़रत ज़ैनब के जीवन का एक अन्य रूप है। मदीने में उनका घर बेसहारा लोगों और निर्धणों का शरणस्थल था।



वे निर्धनों और भूखों की सहायता करने में पवित्र क़ुरआन के सूरए फ़ातिर की आयत संख्य २९ का आदेश पालन करती थीं जिसमें ईश्वर कहता है कि



वे लोग जो ईश्वर की आयतों की तिलावत करते हैं और नमाज़ क़ाएम करते हैं और ईश्वर ने उनकी जो भी आजीविका निर्धारित की है उससे वे निर्धनों की छिपकर या खुलकर सहायता करते हैं।



वे एसे व्यापार की आशा करते हैं जिसमें विनाश और घाटा नहीं है।



हम आशा करते हैं कि ईश्वर हमें इस महान महिला का अनुसरण करने का सामर्थय प्रदान करे क्योंकि इस प्रकार के लोगों का अनुसरण मानव पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।