पैग़म्बरे इस्लाम(स)की नवासी हज़रत ज़ैनब(अ)
 



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हज़रत ज़ैनब के शुभ जन्म दिवस के अवसर पर विशेष चर्चा।



महापुरूषों के जीवन की समीक्षा करना और उनको आदर्श बनाने जैसी बातें आत्मशुद्धि और उचित प्रशिक्षण के महत्वपूर्ण कारक हैं।



इतिहास में ऐसे सदाचारी पुरूषों और महिलाओं के उदाहरण मौजूद हैं जिनमें से प्रत्येक परिपूर्णता के शिखर तक पहुंचे और मानवता के लिए अमर आदर्श में परिवर्तित हो गए।



परिपूर्णता तक पहुंचने और आध्यात्म के उच्च चरणों को तै करने के मार्ग में इन महापुरूषों का जीवन मनुष्य की बहुत सहायता करता है।



पैग़म्बरे इस्लाम (स) की सुपुत्री हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के पश्चात उनके परिवार की एक अत्यंत विशिष्ट और सम्मानीय महिला हज़रत ज़ैनब हैं जो हज़रत फ़ातेमा की ही सुपुत्री हैं।



पांचवी हिजरी क़मरी में हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा और हज़रत अली अलैहिस्सलाम को ईश्वर ने एक सुपुत्री प्रदान की जिसका नाम उन्होंने ज़ैनब रखा।



ज़ैनब का अर्थ होता है पिता का श्रंगार व सम्मान। यह महान महिला, इतिहास के सर्वेश्रेष्ठ व्यक्तित्वों के साथ रहकर धर्म की सर्वोच्च शिक्षाओं से अवगत हुई।



हज़रत ज़ैनब ने पवित्रता, ईश्वरीय भय और धैर्य को अपनी सम्मानीय माता हज़रत फ़ातेमा ज़हरा से सीखा और वीरता, वाकपटुता तथा सदाचारिता को अपने पिता से अर्जित किया। इन विशेषताओं के साथ उन्होंने करबला में अपनी अभूतपूर्व एवं अमर उपस्थिति दर्ज कराई।



हज़रत ज़ैनब ने अपने जीवन का एक यादगार भाग पैग़म्बरे इस्लाम (स) की छत्रछाया में बिताया किंतु पैग़म्बरे इस्लाम (स) के स्वर्गवास के कारण यह काल बहुत जल्दी समाप्त हो गया।



इसके कुछ ही समय के पश्चात पैग़म्बरे इस्लाम की सुपुत्री हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की भी शहादत हो गई और वे अपनी संतान के साथ अधिक समय व्यतीत नहीं कर सकीं।



किंतु इसी अल्पावधि में उन्होंने अपनी संतान को एकेश्वरवाद और अधिकारों की रक्षा के पाठ सिखाए।



हज़रत फ़ातेमा ज़हरा ने बड़ी निष्ठा और उत्साह के साथ व्यवहारिक ढंग से अपनी संतान को इस्लामी शिक्षाएं सिखाईं।



हज़रत ज़ैनब बहुत ही बुद्धिमान थीं। अपनी कुशाग्र बुद्धि के कारण ही उन्होंने अल्पायु में अपनी माता हज़रत फ़ातेमा का व्यापक एवं अभूतपूर्व ख़ुत्बा याद कर लिया।



यह सब स्पष्ट निशानियां, उस लड़की की बुद्धिमानी तथा बौद्धिक परिपक्वता का चिन्ह हैं जिसने ईश्वरीय संदेश से परिपूर्ण वातावरण में पशिक्षण प्राप्त किया था।



उन्होंने अपने पिता हज़रत अली जैसे महान व्यक्ति से ज्ञान और नैतिक गुण सीखे।



उनके ज्ञान की ख्याति इस सीमा तक थी कि "बनी हाशिम" के लोग उन्हें "अक़ीलए बनी हाशिम" की उपाधि से याद करते थे जिसका अर्थ होता है बनी हाशिम की बुद्धिमान महिला।



मदीने की महिलाएं ज्ञान अर्जित करने के लिए हज़रत ज़ैनब के घर जाया करती थीं। हज़रत ज़ैनब उन्हें धार्मिक, सामाजिक, तथा राजनैतिक सहित विभिन्न विषयों की शिक्षा देती थीं।



हज़रत ज़ैनब द्वारा शिक्षा देने का यह क्रम हज़रत अली अलैहिस्सलाम के कूफ़ा नगर में रहने के समय भी जारी रहा क्योंकि वे कूफ़े में अपने पिता के साथ मौजूद थीं।



इस दौरान ज्ञान प्राप्ति की इच्छुक महिलाओं ने हज़रत अली अलैहिस्सलाम के पास यह संदेश भेजा कि हमने यह सुना है कि



आपकी सुपुत्री हज़रत ज़ैनब अपनी माता हज़रत फ़ातेमा की ही भांति उच्च ज्ञान, परिपूर्णता और सदगुणों का स्रोत हैं।



यदि आप अनुमति दें तो हम उनकी सेवा में उपस्थित होकर ज्ञान के इस स्रोत से लाभ उठाएं।



हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने हज़रत ज़ैनब को अनुमति दी कि वे कूफ़े की महिलाओं को शिक्षा दें और उनकी धार्मिक एवं ज्ञान संबन्धी समस्याओं का समाधान करें।



इसके पश्चात हज़रत ज़ैनब ने कूफ़े की महिलाओं को पढ़ाना आरंभ किया। वे उनके लिए पवित्र क़ुरआन की व्याख्या करतीं और साथ ही वे उनकी शंकाओं का समाधान भी किया करती थीं।



हज़रत ज़ैनब इतनी मृदुभाषी, अच्छे आचरण वाली और विनम्र थीं कि बहुत सी महिलाएं पहली ही भेंट में उनके व्यवहार से प्रभावित हो जाती थीं।