पाप या ग़लती का अज्ञानता व सूझबूझ से गहरा संबंध
 



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इस प्रकार से यह स्पष्ट होता है कि ज्ञान व जानकारी, जहां गलतियों से बचाव को सुनिश्चित करती है वहीं सही मार्ग के चयन की संभावना को अधिक करती है।

इस लिए जानकारी व अनुभव जितना अधिक होगा गलतियों से दूरी उतनी ही निश्चित होगी तो यदि हम किसी एसे व्यक्ति की कल्पना करें

जिसकी जानकारी व अनुभव पूर्ण हो और उसमें किसी प्रकार की कोई कमी न हो फिर उससे गलती की संभावना नहीं होती किंतु उसमें संभावना न होने का

अर्थ यह नहीं है कि वह गलतियों से दूर रहने पर विवश होता है और उसमें चयन शक्ति का विशेष अधिकार ही नहीं होता।

यह ठीक उसी प्रकार है जैसे यदि कोई बुद्धि रखने वाला व्यक्ति किसी शर्बत में विष गिरते अपनी आंखों से देख ले तो वह कदापि उस शर्बत को नहीं पीएगा।

अर्थात हम यह कह सकते हैं कि बुद्धि रखने वाला मनुष्य उस शर्बत को पी नहीं सकता किंतु पी नहीं सकता कहने का अर्थ यह नहीं है कि उसमें वह शर्बत पीने की क्षमता ही नहीं है

और वह शर्बत न पीने पर विवश है और शर्बत पीने या न पीने के मध्य निर्णय का अधिकार ही उसके पास नहीं है।

यह अधिकार उसके पास है किंतु बुद्धि व विष के होने का ज्ञान उन्हें शर्बत पीने से रोक देता है ।

यही स्थिति ईश्वरीय दूतों की भी होती है एक मनुष्य होने के नाते और ईश्वर द्वारा मनुष्यों को प्रदान की गयी चयन शक्ति व अधिकार के दृष्टिगत यदि वे चाहें तो पाप कर सकते हैं

किंतु उन्हें जो वास्तविकताओं का पूर्ण ज्ञान होता है और पापों की बुराइयों से चूंकि वे अवगत होते हैं इस लिए पूर्ण ज्ञान उनके भीतर पाप की इच्छा को जन्म ही नहीं लेने

देता किंतु इसका अर्थ यह नहीं होता कि वे पाप करने में अक्षम और मनुष्य को प्रदान किये गये चयन अधिकार से वंचित होते हैं।

वास्तव में पापों की बुराई ईश्वरीय दूतों के लिए उसी प्रकार स्पष्ट होती जैसा बुद्धि रखने वाले के लिए विष की बुराईयों और जिस प्रकार बुद्धि रखने वाला व्यक्ति शर्बत में

अपनी आखों से विष गिरते देखने के बाद अपनी इच्छा से उसे नहीं पीता उसी प्रकार ईश्वरीय दूत भी पापों से अपनी इच्छा से दूर रहते हैं और इस उनकी इस इच्छा का कारण उनका ज्ञान होता है।

हमारी आज की चर्चा के मुख्य बिन्दु इस प्रकार थेः

ईश्वरीय दूत इस लिए ईश्वरीय संदेश प्राप्त करने का प्राप्त बनते हैं क्योंकि उनमें कुछ एसी विशेषताएं व क्षमताएं होती हैं

जो हर मनुष्य में नहीं हो सकती और यही विशेषताएं व क्षमताएं उन्हें पापों से भी रोकती हैं।