प्रलय है क्या?
 



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मनुष्य की आत्मा चूंकि निराकार होती है इस लिए शरीर के नष्ट होने के बाद भी बाक़ी रह सकती है और जब उसका शरीर से पुनः संपर्क स्थापित हो तो वह एक एकता व प्रवृत्ति



को सुरक्षित रख सकती है जैसा कि उसने मृत्यु से पूर्व मनुष्य की प्रवृत्ति को एक रखा है अर्थात जिस प्रकार से जीवन के समय यद्यपि मनुष्य के शरीर की कोशिकाएं बदलती रहती हैं



किंतु उसे भिन्न मनुष्य नहीं कहा जाता क्योंकि उसका शरीर धीरे धीरे और चरणों में भले ही बदल जाता है किंतु चूंकि उसकी आत्मा एक ही रहती है इस लिए वह मरते दम तक अपनी



पहचान पर बाक़ी रहता है।



क़यामत या हिसाब किताब के दिन क्या होगा और कैसे हिसाब लिया जाएगा अथवा दंड या पारितोषिक दिया जाएगा इन सब बातों को सही रूप से समझने के



लिए इस बात का विश्वास आवश्यक है कि आत्मा भौतिक नहीं होती और न ही भौतिक शरीर की भांति नष्ट होती है क्योंकि यह यह मान लिया जाए कि आत्मा



शरीर की भांति भौतिक होती है और शरीर के नष्ट होने के साथ ही नष्ट हो जाती है तो फिर क़यामत और हिसाब किताब के दिन की कल्पना अत्याधिक कठिन बल्कि अंसभव हो जाएगी।



इस प्रकार से हमारी आज की चर्चा का निष्कर्ष जो वास्तव में क़यामत के बारे में व्यापक चर्चा की भूमिका है, यह निकला कि मृत्यु के बाद एक नये जीवन की कल्पना उसी समय संभव है



जब आत्मा को शरीर और उसकी विशेषताओं से भिन्न माना जाए बल्कि यह भी न माना जाए कि आत्मा शरीर में समा जाने वाले एक भौतिक वस्तु है कि जो शरीर के नष्ट होते ही नष्ट हो



जाएगी इस प्रकार से सब से पहले से आत्मा को स्वीकार करना होगा और फिर उसे भौतिक विशेषताओं से दूर तथा तूल तत्व माना चाहिए न की शरीर की विशेषता। अर्थात आत्मा को एक



भिन्न अस्तित्व समझा जाना चाहिए जिसका संपर्क शरीर से होता है किंतु वह शरीर का अंश नहीं होती बल्कि स्वंय उसका अपना अस्तित्व होता है और उसका शरीर से संपर्क होता है



किंतु यहां पर प्रश्न यह उठता है कि यदि आत्मा अलग अस्तित्व है और शरीर का भाग या शरीर में समायी हुई नहीं है तो फिर शरीर में उसकी स्थिति क्या है?



इस प्रश्न के उत्तर में हम यह कह सकते हैं कि शरीर व आत्मा से मेल जो शरीर की रचना इस प्रकार नहीं है जैसे जल आक्सीजन व हाइड्रोजन से मिल कर बना होता है क्योंकि यदि



आक्सीजन और हाइड्रोजन एक दूसरे से अलग हो जाएं तो जल नामक वस्तु का अस्तित्व ही समाप्त हो जाता है किंतु आत्मा और शरीर का मेल एसा नहीं है



अर्थात एसा नहीं है कि जब शरीर और आत्मा का मेल समाप्त हो जाए तो मनुष्य का अस्तित्व भी समाप्त हो जाता है बल्कि मनुष्य नामक अस्तित्व का मूल तत्व वास्तव में आत्मा है



और जब तक आत्मा रहती है मनुष्य की मनुष्यता और उसका व्यक्तित्व अपनी समस्त विशेषताओं के साथ रहता है और शरीर का स्थान वस्त्र की भांति होता है



और यही कारण है कि शरीर की कोशिकाओं में बदलाव से मनुष्य की पहचान व व्यक्तिव में बदलाव नहीं आता ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार वस्त्र बदलने से मनुष्य की पहचान नहीं बदलती किंतु



इस पूरी चर्चा का आधार यह है कि हम आत्मा को भौतिक न माने किंतु प्रश्न यह है कि हम आत्मा को भौतिक क्यों न माने? इस पर हम अगले कार्यक्रम में



चर्चा करेंगे फिलहाल आज की चर्चा के मुख्य बिन्दुः



क़यामत या हिसाब किताब के दिन पर विश्वास के लिए यह विश्वास आवश्यक है कि आत्मा और शरीर का मिलाप, विशेष दशा में होता है और दोनों की विशेषताएं अलग अलग होती हैं।



मनुष्य के शरीर की कोशिकाओं में बदलाव से उसका व्यक्ति नहीं बदलता क्योंकि मनुष्य के व्यक्तिव की रचना का मूल तत्व आत्मा है शरीर नहीं।



प्रलय पर विश्वास के लिए यह मानना आवश्यक है कि आत्मा भौतिक नहीं होती और न ही शरीर के साथ नष्ट होती है।